हैकर्स पर लगाम लगाने की तैयारी, GPT-6 Cyber से मजबूत होगी कंपनियों की साइबर सुरक्षा

OpenAI ने साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में एक नया AI मॉडल GPT-6 Cyber लॉन्च किया है. इसे खास तौर पर कंप्यूटर, ऐप और सॉफ्टवेयर में छिपी सुरक्षा की कमियों को खोजने के लिए बनाया गया है. इसकी मदद से सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स पता लगा सकेंगे कि किसी सॉफ्टवेयर में कहां गलती है और हैकर उस कमी का फायदा कैसे उठा सकते हैं. सबसे खास बात यह है कि यह AI सिर्फ खामी खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे ठीक करने का तरीका भी सुझा सकता है.
आजकल बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, सरकारी सेवाओं और दूसरी जरूरी चीजों में सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है. ऐसे में अगर किसी सिस्टम में सुरक्षा की कमी रह जाए, तो हैकर्स उसका फायदा उठाकर डेटा चुरा सकते हैं या सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं. GPT-6 Cyber इसी तरह के खतरों को पहले से पहचानने में मदद करेगा, ताकि कंपनियां समय रहते अपनी सुरक्षा मजबूत कर सकें.
Firefox में खोजीं 81 बड़ी खामियां
OpenAI का दावा है कि उसके रिसर्चर्स ने GPT-6 Cyber की मदद से Firefox ब्राउजर में 81 ऐसी सुरक्षा कमियां खोजीं, जिनके बारे में पहले जानकारी नहीं थी. इन सभी खामियों को गंभीर माना गया है. अच्छी बात यह है कि Mozilla ने इनमें से कई कमियों को ठीक करने के लिए अपडेट जारी करना शुरू कर दिया है.
इसके अलावा, OpenAI ने इस AI मॉडल की मदद से Linux सिस्टम की 948 कमजोरियों के लिए ऐसे तरीके तैयार किए, जिनसे यह जांचा जा सके कि इन कमियों का फायदा उठाकर सिस्टम में सेंध लगाई जा सकती है या नहीं. इनमें 588 ऐसी कमजोरियां थीं, जिनकी जानकारी पहले नहीं थी.
भारत के फाइनेंशियल सेक्टर पर भी खतरा
AI का इस्तेमाल सिर्फ सुरक्षा बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि साइबर हमलों में भी हो रहा है. भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने Crafty Falcon नाम के AI की मदद से किए जा रहे साइबर अटैक को लेकर चेतावनी दी है. इस अभियान में हमलावर NBFCs, डिजिटल लोन देने वाली कंपनियों, फिनटेक प्लेटफॉर्म और क्रिप्टो एक्सचेंज को निशाना बना रहे हैं. इसके लिए ARTEX, PentAGI और CyberStrikeAI जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है.
हमलावर कंपनियों के पेमेंट और लोन सिस्टम में मौजूद कमियों का फायदा उठाकर बिना अनुमति पैसे ट्रांसफर करने की कोशिश कर रहे हैं.हालांकि, भारत का Crafty Falcon अभियान और OpenAI का GPT-6 Cyber दो अलग-अलग मामले हैं. इनका आपस में कोई संबंध सामने नहीं आया है. लेकिन दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि AI का इस्तेमाल सुरक्षा बढ़ाने के साथ साइबर हमलों के लिए भी किया जा सकता है.
पुराने AI मॉडल से कितना बेहतर है?
OpenAI के मुताबिक, GPT-6 Cyber पिछले मॉडल GPT-5.6 Cyber से काफी बेहतर है. कंपनी ने इसे ExploitGym नाम के टेस्ट में आजमाया. इस टेस्ट में नए मॉडल को 48.5 फीसदी स्कोर मिला, जबकि पुराने मॉडल का स्कोर 32.1 फीसदी था.
आसान भाषा में समझें तो नया AI किसी सॉफ्टवेयर की कमजोरी को पहचानने और यह जांचने में ज्यादा बेहतर है कि उसका गलत फायदा कैसे उठाया जा सकता है. इससे सिक्योरिटी टीम को खतरे को समझने और उसे ठीक करने में मदद मिलेगी.
हर कोई नहीं कर पाएगा इसका इस्तेमाल
GPT-6 Cyber को फिलहाल आम लोगों के लिए जारी नहीं किया गया है. OpenAI ने शुरुआत में इसका एक्सेस कुछ चुनिंदा और वेरिफाइड साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और कंपनियों को दिया है. इसके लिए Daybreak Red प्रोग्राम के तहत मंजूरी जरूरी होगी.
कंपनी ने इसमें सुरक्षा के खास इंतजाम भी किए हैं, ताकि AI को सिर्फ उसी सिस्टम की जांच करने की अनुमति मिले, जिसके लिए एक्सपर्ट को इजाजत मिली है. यानी इसका मकसद हैकर्स की मदद करना नहीं, बल्कि कंपनियों को हैकिंग से बचाना है.
GPT-6 Cyber साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है. इसकी मदद से सॉफ्टवेयर की छिपी हुई कमियों को जल्दी खोजा जा सकेगा और उन्हें ठीक करने में भी मदद मिलेगी. इससे भविष्य में ऑनलाइन सेवाओं और कंप्यूटर सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है.



