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एलॉन मस्क और CJP आंदोलन पर सियासी घमासान, ओवैसी के बयान के बाद बृजभूषण सिंह ने भी साधा निशाना

नई दिल्ली
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एलन मस्क के बयानों पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध अपनी जगह है, पर कोई विदेशी कारोबारी भारत को आदेश नहीं दे सकता. स्टारलिंक को भारत में मंजूरी मिलने में देरी से शुरू हुए इस विवाद में राहुल गांधी ने उद्योगपतियों से सरकार के रिश्तों पर हमला बोला, जबकि ओवैसी ने बीजेपी से राष्ट्रवाद पर सवाल पूछा। 

स्पेसएक्स के मालिक और टेस्ला के सीईओ मस्क ने आरोप लगाया कि कुछ ओलिगार्क अपना दबदबा बचाने के लिए स्टारलिंक की एंट्री रोक रहे हैं. उन्होंने पूछा कि क्या रिलायंस चेयरमैन मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं, और उन्हें प्रधानमंत्री मुकेश अंबानी तक कह डाला। 

सरकार ने भेदभाव के आरोप को खारिज किया. सरकार के मुताबिक स्टारलिंक, रिलायंस जियो की सैटेलाइट कंपनी और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब, तीनों लाइसेंसधारी कंपनियों की सुरक्षा जांच चल रही है और वे लगभग एक ही चरण में हैं. सुरक्षा जांच और स्पेक्ट्रम मंजूरी के बिना कोई सेवा शुरू नहीं कर सकता। 

 मस्क के इशारे पर चल रहा CJP का आंदोलन
बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'लहरा दो तिरंगा' विरोध प्रदर्शन को लेकर एलॉन मस्क पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा आंदोलन मस्क के इशारे पर चलाया जा रहा है और इसके पीछे भारत के खिलाफ बड़ी साजिश है। 

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, "यह पूरा आंदोलन उनके (एलॉन मस्क) इशारे पर चलाया जा रहा है. यह हमारे देश के खिलाफ एक बहुत बड़ी साजिश है. हमारे देश की तुलना बांग्लादेश और पाकिस्तान से की जा रही है, और पहली बार यहां सुप्रीम कोर्ट को डराने के इरादे से एक मार्च आयोजित किया गया है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. ये विदेशी लोग, जो हमारे देश में व्यापार तो करना चाहते हैं, लेकिन सिर्फ अपनी शर्तों पर, वही इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं। 

मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ एआईएमआईएम के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद हैदराबाद में ओवैसी ने कहा कि वे हमेशा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ थे और रहेंगे, लेकिन मस्क प्रधानमंत्री के बारे में ऐसा कैसे लिख सकते हैं. उन्होंने पूछा कि बीजेपी और मोदी सरकार गोरी चमड़ी से इतना क्यों डरती है। 

उन्होंने कहा कि देश के संसाधन कैसे इस्तेमाल होंगे, यह देश तय करेगा. अमेरिका पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए बोले कि वह भारत से रूसी तेल कम खरीदने को कहता है, जबकि खुद रूसी ऊर्जा उत्पाद खरीदता है. सस्ते डेटा चार्ज का हवाला देकर उन्होंने उस सोच पर भी सवाल उठाया कि मौजूदा व्यवस्था नागरिकों का नुकसान करती है. उन्होंने मोदी से कहा कि मस्क को साफ बता दें कि भारत अपने फैसले खुद लेगा, और किसी गोरे का पेट भरने के लिए नागरिकों का पेट नहीं काटा जाएगा। 

राहुल गांधी का रुख अलग रहा. मस्क के अंबानी वाले सवाल पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने एक्स पर लिखा, "वेलकम टू इंडिया, एलन. दूसरे वाले से मिलने तक रुकिए." उन्होंने नाम नहीं लिया, पर इशारा गौतम अडानी की ओर माना गया, जिन पर कांग्रेस सरकार से नजदीकी का फायदा उठाने का आरोप लगाती रही है. राहुल ने इंस्टाग्राम पर मोदी और अडानी की जेट वाली तस्वीर भी साझा की. मस्क ने जवाब दिया, "शुक्रिया राहुल, यह वाकई चिंताजनक है। 

ओवैसी का कहना था कि मोदी का विरोध करने का मतलब मस्क का समर्थन नहीं है. राष्ट्रवाद पर टिकी राजनीति करने वाली बीजेपी के लिए यह सवाल टालना आसान नहीं होगा। 

स्टारलिंक को लेकर एलॉन मस्क और भारत में विवाद
एलॉन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को भारत में व्यावसायिक मंजूरी मिलने में देरी को लेकर विवाद रहा है. मस्क ने आरोप लगाया था कि कुछ बड़े कारोबारी हितों के कारण उनकी सेवा को भारत में आगे बढ़ने से रोका जा रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत के टेलीकॉम बाजार में कंपटीशन और स्टारलिंक को मंजूरी मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे। 

मस्क ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को भी निशाने पर लिया था. उन्होंने तंज कसते हुए पूछा था कि क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं. मस्क ने यह भी कहा था कि स्टारलिंक को भारत में काम करने की अनुमति मिलने से दूरदराज के इलाकों में लोगों को तेज इंटरनेट मिल सकता है और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में मदद मिल सकती है। 

भारत सरकार और रिलायंस का क्या कहना है?
मस्क के आरोपों पर भारत सरकार ने पक्षपात के दावों को खारिज किया था. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और दूरसंचार मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि स्टारलिंक को राष्ट्रीय सुरक्षा और स्पेक्ट्रम से जुड़ी जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समर्थित वनवेब भी मौजूद हैं। 

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी कहा था कि उसे प्रतिस्पर्धा से डर नहीं है और वह स्टारलिंक का स्वागत करती है. हालांकि, कंपनी ने जोर दिया था कि विदेशी कंपनियों को भारत के कानूनों का पालन करना होगा. कंपनी के मुताबिक, उसकी अपनी सैटेलाइट सेवा भी नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया से गुजर रही है। 

 

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