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दुनिया में अनोखा AI प्लान! साउथ कोरिया में जनता के लिए FREE AI, सरकार करेगी फंडिंग

सोल

कैसे हो अगर जिन AI टूल्स को इस्तेमाल करने के लिए आपको महंगा सब्सक्रिप्शन खरीदना पड़ रहा है, वो सब FREE हो जाएं? सुनने में यह किसी सपने जैसा लग सकता है कि लेकिन एक देश अपने सभी नागरिकों को यह शानदार तोहफा देने जा रहा है। दरअसल, South Korea अपने नागरिकों को एक शानदार सरप्राइज देने की तैयारी में है। 

साउथ कोरिया कथित तौर पर अपनी पूरी आबादी को जेनेरिक AI सर्विसेज तक मुफ्त एक्सेस देने की योजना बना रहा है। यह एक सरकारी पहल है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जरूरी सार्वजनिक सुविधा की तरह देखा जा रहा है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य लोगों को मुफ्त में ऐसे एआई चैटबॉट और एजेंट उपलब्ध कराना है जो रोजमर्रा के काम संभाल सकें। हाल ही में, साइंस और आईसीटी मंत्रालय ने अपनी 'AI फॉर एनरीवन' प्रोजेक्ट के लिए छह बोलीदाताओं में से तीन सिंडिकेट को चुना है, जिसका उद्देश्य इसे पूरे देश में लागू करना है।

सरकार इसका पूरा खर्च भी उठाएगी
सरकार तीन ग्रुपों को मिलाकर 512 NVIDIA B200 ग्राफिक्स कार्ड देगी और 2027 से पूरे देश की सर्विसेस का खर्च भी उठाएगी। यह प्रोजेक्ट सामान्य चैटबॉट से बहुत आगे है, क्योंकि इसमें एजेंटिक AI होगा जो खुद पब्लिक सर्विस चला सकेगा, जिसमें फाइनेंस, हेल्थकेयर, हाउसिंग और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। SK Telecom एक ऐसा ऑटोनॉमस एजेंट बना रहा है जो यूजर का रिक्वेस्ट लेगा और खुद प्लानिंग से लेकर पूरा काम कर देगा।

उसी सर्विसेज को वेब, फोन कॉल और टेक्स्ट मैसेज के जरिए डिजिटल रूप से भी एक्सेस किया जा सकता है। एआई-पावर्ड कॉल उन संगठनों तक पहुंचने में मदद करेंगी जो अभी भी सिर्फ एनालॉग सिस्टम इस्तेमाल करते हैं और जिनके पास कोई डिजिटल इंटरफेस नहीं है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूजर्स को एक ही बातचीत में तुलना करने से लेकर कामों का आकलन करने तक गाइड करने के लिए बनाई गई है। इसके अलावा, मंत्रालय सितंबर में तीन ग्रुप्स के साथ डील फाइनल करने की योजना बना रहा है, फिर बीटा सर्विसेज लॉन्च करेगा और साल के अंत तक पूरा डेवलपमेंट होने की उम्मीद है।

दक्षिण कोरिया के इस कदम का सबसे बड़ा फायदा किफायती होना होगा। बहुत से लोग चैटजीपीटी, जेमिनी या क्लॉड जैसे प्रीमियम एआई टूल्स का खर्च नहीं उठा सकते, इसलिए सरकार द्वारा समर्थित मुफ्त विकल्प, जिसमें उपयोग की कोई सीमा नहीं होगी, उनकी मदद करेगा। अधिकारियों के अनुसार लगभग एक-तिहाई आबादी अभी भी एआई का इस्तेमाल नहीं कर पाती, और यह पहल उस खाई को पाटने का प्रयास है। इससे देश को अपने खुद के एआई मॉडल विकसित करने में भी मदद मिलेगी, बजाय इसके कि वह चीनी या अमेरिकी कंपनियों पर ज्यादा निर्भर रहे।

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